ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा। बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥

रविवार, 8 मई 2016

फूलों द्वारा वशीकरण......भाग 8..संतान की उन्नति..

मोंगरा का फूल एक ऐसा फूल है, जिस के द्वारा आप अपने बच्चों की उन्नति कर सुख प्राप्त कर सकते हो !!

जीवन चक्र का आरम्भ भी फूलों के द्वारा हो संभव हो पाता है, जब तक फूल नही होगा तब तक सृष्टि उत्पन्न नही होगी, अर्थात फूल से बीज बनता है, बीज से नया सृजन होता है, फूल से ही फल का निर्माण, फल से बीज इत्यादि ये जीवन चक्र इसी प्रकार से फूलों के इर्द गिर्द ही घूमता रहता है,अतः फूल के बिना सृष्टि की कल्पना भी नही की जा सकती है.

समस्त फूलों के देवता अलग अलग है, लेकिन कामदेव सभी फूलों के प्रधान देव के रूप में माने जाते है,काम देव के पास एक ऐसा अमोघ बाण है जो पुष्प बाण के नाम से विख्यात है जब किसी पर ये बाण चलता है तो वो कामाग्नि से विचलित हो उठता है.इसीलिए फूलों का तंत्र शास्त्र में बहुत बड़ा प्रभाव माना गया है,काम देव का वास फूलों में होने के कारण सभी देवी देवता इन फूलों को सहर्ष स्वीकार करते है, आसन के रूप में भी इसे स्वीकार करते है.

अब  तक आप और हम सब लोग केवल पूजा, श्रृंगार आदि सजावट के कार्यों में फूल अर्पित करते होंगे. लेकिन आप ये नही जानते कि फूल में इतनी अधिक शक्तियां गुप्त रूप से विद्यमान रहती है जिसके द्वारा हम सभी अपनी समस्त मनोकामना तथा सभी जीवों पर वशीकरण क्रिया कर सकने में सक्षम होते है, सभी मनोकामना के लिए शास्त्रों में अलग अलग फूल का निर्देश दिया है, क्योंकि सभी फूलों में अलग अलग देवी देवता का वास या आधिपत्य होता है.अलग अलग मनो कामना के लिए अलग अलग रंग-रूप के फूलों की आवश्यकता होती है,
प्रत्येक फूल का अपना एक अलग वार होता है तथा उसके गुण किसी दुसरे फूल में मिलान नही करते है, उदाहरण के लिए गुलाब का फूल को लेते है लाल गुलाब मंगलवार तथा रविवार में अधिक शक्ति या ऊर्जा देता है, गुलाबी पिंक गुलाब शुक्रवार, सफेद गुलाब सोमवार तथा काला गुलाब बुधवार तथा शनिवार को अधिक प्रभावी रहता है अतः फूल के रंगों द्वारा उसके वार को ज्ञात कर सकते है क्योंकि  जो वार होगा उस वार के रंग की किरणें उस दिन सर्वाधिक रहती है ये सूत्र हमेशा याद रखें. आज इन फूलों की शक्तियों का लाभ उठाने की क्रिया को आप सबके सामने रख रहा हूँ,

कुछ समस्याएं मनुष्य के जीवन को आज के युग में परेशान करती है जो की लगभग सभी मनुष्यों में एक समान है वो है बच्चों के जिद्द की समस्या, अर्थात आजकल बच्चों की शिक्षा और उनकी सोसायटी ऐसी बन गयी है की बच्चे अपने घर वालों की बात ही नही मानते तथा कई बार बुरे कर्मों में फंस जाते है उस के कारण मनुष्य को बहुत परेशानी हो जाती है,,

इसी परेशानी के कारण कई बार घर में क्लेश या घर टूट जाते है,क्यों कि समाज में बच्चों के कारण बहुत बदनामी से बिखराव आ जाता है तथा धन इज्ज़त आदि सब मिटटी में मिल जाता है. फूलों के द्वारा हम इस धन की समस्या से छुटकारा पा कर  लाभ उठा सकते है. ये समस्या खत्म करने के लिए जो फूल ऋषि मुनियों ने बताया है वो है..मोंगरा का फूल, इस मोंगरा  के फूल में माँ सरस्वती  देवी का वास है,

अतः हम मोंगरा  के फूल द्वारा बच्चों की इस प्रकार की समस्या मुक्ति पा सकते है,

कैसे ????

यदि आपका बच्चा पढ़ने लिखने में ध्यान नही देता है तथा अपने दोस्तों की बात ज्यादा मानता है या दोस्तों के साथ दिन भर खेलने में समय खराब कर रहा है या किसी बुरे व्यसन में पड़ कर अपना जीवन खराब करने में लगा हुआ है तो मोंगरा फूल का उपाय करें इससे जल्दी शुभ परिणाम मिलने शुरू हो जायेंगे, सोमवार, बुधवार और शुक्रवार प्रातः 5 मोंगरा के फूल खरीद कर या किसी भी तरीके से ले कर घर लाने से पहले मंदिर में जाकर सिन्दूर वाले श्री हनुमान जी की मूर्ती के पास रख कर अपने पुत्र या पुत्री का नाम लेकर उसके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उन फूलों पर 5 बार हनुमान जी के पैर से सिन्दूर लेकर तिलक कर घर ले आयें और जिस जगह पर बच्चा सोता है उस जगह किसी कांच की कटोरी में रख दें.बुधवार सुबह तक रखा रहें, बुधवार फिर इसी प्रकार से दुबारा करें तो ये शुक्रवार तक रखना है शुक्रवार फिर से फूल ला कर इसी प्रकार से सोमवार तक रखने है.ऐसा  5  बार करें ....

यदि आपका बच्चा किसी गलत प्रेम के चक्कर में आ गया हो तो  इसी मोंगरा के 7 फूल लेकर उसके तकिये के नीचे शुक्रवार रात में रखें तथा शनिवार सुबह से दोपहर तक किसी भी समय चलते पानी में बहा दें. इसके करने से प्रेम  के चक्कर से निकल जाएगा तथा अपने माता-पिता  की आज्ञा पालन करने लगेगा चाहे पुत्र हो या पुत्री दोनों के लिए ये एक रामबाण उपाय है. इसके द्वारा उसकी बुद्धि भी शुद्ध और निर्मल होती जायेगी लगातार करने से हमेशा के लिए सही हो जाएगा.

यदि आपका बच्चा घर से चोरी करने लगा है, या घर से बार बार भाग जाता है तो इसके लिए 11 मोंगरे के फूल मंगलवार लेकर शाम के समय उस पर शहद लगा कर किसी भी मंदिर में उस बच्चे के हाथ से रखवा दों  ऐसा  5 मंगलवार करने से लाभ मिल जाएगा यदि कोई कमी रह गयी हो तो 11 मंगलवार करें, जल्दी वो पूर्ण रूप से ठीक हो जाएगा..

शुभमस्तु !!

शुक्रवार, 6 मई 2016

फूलों द्वारा वशीकरण......भाग 7..स्वस्थ बने..

"एक छोटा सा चमेली का फूल इतना चमत्कारी होता है जो आप सोच भी नहीं सकते, "चमेली" नाम पारसी शब्द "यासमीन" से बना है, जिसका मतलब "प्रभु की देन" है "

चमेली एक सुगंधित फूल है, जिसके महक मात्र से लोग मोहित हो जाते है.  इस फूल से बहुत सारी दवाइयां बनायी जाती हैं, जो सिर दर्द, चक्कर, जुकाम आदि में काम आता है़.अतः ये फूल हम सबको स्वस्थ बनाने में अधिक सहायक है.

दुनिया के किसी भी धर्म  में, किसी भी सार्वजनिक कार्य में, पूजा पाठ, उपासना, ख़ुशी के उपलक्ष्य में आदि आदि ऐसे कई प्रकार के उत्सव है सभी में विभिन्न प्रकार के फूलों का बहुत अधिक प्रयोग होता रहा है और आज भी अधिक मात्रा में फूलों को सबसे पहले लिया जाता है.  पूजा पाठ आदि में यही फूल श्रद्धा के फूल बन जाते है, तथा मृत्यु के उपरान्त यही फूल श्रद्धा सुमन के रूप में हम सब के सामने आते है.


सिद्ध स्थानों, हिमालय के दूर के स्थानों पर, सुनसान या वीराने स्थान पर उत्पन्न  फूलों में योगिनी शक्तियां विद्यमान रहती है,यहाँ तक कि सभी फूलों में कोई ना कोई शक्ति गुप्त रूप में अवश्य रहती है,फूल जब हम किसी को भेंट करते है तो वो शक्ति भी साथ चली जाती है और उस की भावना को प्रगट कर कामना पूरी कर देती है,

ज्योतिष नक्षत्र और तिथि वार आदि के संयोग से फूल तोड़ कर लाभ उठाया जा सकता है.आधुनिक चिकित्सा शास्त्र, होमियोपैथ ,आयुर्वेद आदि में भी फूलों के प्रयोग का विवरण है.

समस्त फूलों के देवता अलग अलग है, लेकिन कामदेव सभी फूलों के प्रधान देव के रूप में माने जाते है,काम देव के पास एक ऐसा अमोघ बाण है जो पुष्प बाण के नाम से विख्यात है जब किसी पर ये बाण चलता है तो वो कामाग्नि से विचलित हो उठता है.इसीलिए फूलों का तंत्र शास्त्र में बहुत बड़ा प्रभाव माना गया है,काम देव का वास फूलों में होने के कारण सभी देवी देवता इन फूलों को सहर्ष स्वीकार करते है, आसन के रूप में भी इसे स्वीकार करते है.
http://vashikaran-science.blogspot.in/
इसीलिए इन फूलों को बार बार अकारण तोड़ने की गलती कभी नही करनी चाहिए, ऐसा करने से दोष लग जाता है और ये पाप कर्म की श्रेणी में भी आता है.
फूलों द्वारा हम वशीकरण क्रिया को आसानी से कर सकते है, अपने देवताओं को प्रसन्न कर सकते है, और भी अनेक कार्य इन्हीं फूलों के द्वारा हम सिद्ध कर सकते है.
यदि आप फूल तोड़ कर भेंट करते है तो उचित रहेगा, खरीदें हुए फूल का असर बहुत कम तथा विलम्ब से मिलता है.

प्रत्येक फूल का अपना एक अलग वार होता है तथा उसके गुण किसी दुसरे फूल में मिलान नही करते है, आकर्षक बनने के लिए आप "चमेली का फूल" का प्रयोग करें. यह फूल आपकी अच्छी सेहत बनाने में बहुत अधिक सहायक है, 

वैज्ञानिकों की मानें तो अब अनिद्रा के शिकार लोगों को नींद की गोलियां खाने की कोई जरूरत नहीं है. बल्कि चमेली के फूल की सुगंध इसका आसान, सुरक्षित और कुदरती उपाय हो सकता है. जर्मन वैज्ञानिकों की ताजा शोध रिपोर्ट के मुताबिक पूरी सांस भरकर ली गई चमेली की सुगंध नींद आने में मददगार होती है. इससे नींद की गोलियों के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है.प्राचीन ग्रंथों में इस चमेली के तेल और फूल द्वारा भगवान मृत्युंजय शिव को प्रसन्न कर स्वस्थ रह कर लम्बी आयु प्राप्त की जा सकती है.

मनुष्य के शरीर में कोई भी ऐसा असाध्य रोग नही है जो कि चमेली के फूल द्वारा ठीक ना हों..रोगी के सिर की बांयी तरफ यदि चमेली के फूल का गुलदस्ता प्रतिदिन रखने से उसका रोग शीघ्र ठीक होने लगता है, वैद्य या डॉ द्वारा दी गयी ओषधिया जल्दी असर करने लगती है.

प्रतिदिन 7 चमेली के फूल को अपने जेब में रखने से भगवान धन्वन्तरी जी का वशीकरण होता है जिसके द्वारा समस्त रोगों का निवारण हो कर स्वस्थ होकर लम्बी आयु मिलती है, ऐसा मेने अनुभव में भी देखा है,

हिमाचल में ऊना नामक स्थान से 15km दूर एक गाँव में एक व्यक्ति पिछले 29 वर्षों से चमेली के फूल को हमेशा अपनी जेब में रखते है उसी के परिणाम स्वरूप आज तक सर दर्द जैसा छोटा रोग भी उन्हें नही हुआ सभी प्रकार से वह व्यक्ति स्वस्थ है,आज उसकी आयु 93 वर्ष है, बाल काले, दांत मजबूत अर्थात पूर्णतया स्वस्थ है, इसी चमेली के फूल के द्वारा ये परिणाम मेरे सामने है,

"चमेली के फूल का पौधा आप सोमवार ला कर अपने घर बगिया या किसी गमलें में भी लगा कर परिवार सहित लाभ उठा सकते है,"

शनिवार प्रातः चमेली के 24 फूल घर लाकर इन पर रोली, कुंकुम या सिन्दूर का छींटा लगा कर दोनों हाथों से किसी नदी या सरोवर में विसर्जित करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है 24 ही शनिवार करने से इसका लाभ देख कर आप आश्चर्य में पड़ जायेंगे.

सभी प्रकार के प्रयोग के लिए एक दिन पहले चमेली के पेड़ के पास जा कर पहले फूल ले जाने का निमंत्रण देना चाहिए, तथा सम्मान के साथ कोई भी फूल तोड़ने से ही कामना पूरी होती है.

इस प्रकार रविवार को प्रातः  निवेदन कर एक नीले  रंग का  धागा उस चमेली के पेड़ की किसी भी टहनी में बाँध दें. सोमवार  प्रातः  पीले रंग का कपड़ा सिर पर ढक कर ससम्मान 24  फूल तोड़ कर ले आयें, घर आकर फूलों को शुद्ध स्थान में रखें तथा एक लकड़ी की चौकी पर नीले  रंग का कपड़ा बिछाएं उस पर ये फूल रखें, धुप दीप सामने रख कर शुद्ध जल का छींटा फूलों पर करें,तत्पश्चात  मुश्क कपूर  भी  किसी छोटी कटोरी भी फूलों के साथ रख कर इसी चमेली के तेल से छींटे दें. 

अच्छी सेहत और मृत्यु को जीतने वाले भगवान आशुतोष शिव  जी है इन्ही नीलकंठ भगवान जी का मानसिक स्मरण करें कि भगवान शिव  हम पर कृपा करें तथा मेरे शरीर के समस्त रोगों का नाश कर मुझे पूर्णतया स्वस्थ बनाएं इस प्रकार प्रार्थना करनी चाहिए.

इसके पश्चात चमेली के तेल  का 15  से 20  मिनट तक छींटा कर मन ही मन ह्रदय और श्रद्धा से अपनी प्रार्थना लगातार एकाग्र हो कर करें.इसके बाद धुप और दीपक द्वारा भगवान शिव की आरती इन फूलों की करें, तथा छुआरें बादाम  का  प्रशाद रख कर  रोगी ग्रहण करें.

बाहर के किसी व्यक्ति को नही देना,इस क्रिया के 16 घंटे बाद या अगली सुबह इन फूलों को  चलते पानी में विसर्जित कर देना चाहियें.

इस प्रकार से श्रद्धापूर्वक करने से आप के अंदर नयी शक्ति का संचार आरम्भ होने लगेगा तथा  भगवान शिव की कृपा से मानसिक आदि सभी रोग आप्सें दूर चले जायेंगे तथा स्वस्थ  लाभ होने लगेगा, ये क्रिया प्रत्येक सोमवार करें, 16 बार करने से तुरंत लाभ होना आपको दिखाई दे जाएगा. रोग यदि अधिक पुराना या असाध्य है तो यही क्रिया दोबारा कर लेनी चाहियें,

 "भगवान शिव जी आप सब की मनोकामना इस तंत्र द्वारा पूर्ण कर स्वस्थ और सुंदर बनाने में सहयोग करें....." 

ऐसी मेरी शुभकामनाएं है.....

अगले भाग में बच्चों की उन्नति  करने हेतु  का फूलों द्वारा प्रयोग देने जा रहा हूँ...



श्रीरस्तु  !!